रांची: झारखंड के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाने को लेकर कई गैर सरकारी संगठन कार्य कर रहे हैं. यह कार्यक्रम यूरोपियन यूनियन के वित्तीय सहयोग से राज्य के रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा के 24 प्रखंडों के 464 पंचायतों चल रहे है. इसे लेकर आज रांची के एक होटल में कार्य से जुड़े एनजीओ लीड्स के तत्वावधान में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
संस्था के सदस्यों ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा ग्रामीणों तक पहुंचना है. झारखंड जैसे अत्यंत गरीब, पिछड़े, निराश्रित एवं वंचित आदिवासी बहुल राज्य में क्लीन एनर्जी सोल्यूशन को सुगम और आसान बनाना है. कार्यक्रम के प्रोग्राम मैनेजर नीर झरी ने बताया कि संस्था यूरोपियन यूनियन की मदद से झारखंड में रिन्यूएबल एनर्जी पर काम हो रहा है. झारखंड में जितना काम होना चाहिए, उतना नहीं हो पाया है. अनियमित विद्युत आपूर्ति के कारण गांव के लोगो को परेशानी होती है. बिजली नहीं रहने से गांव के बच्चों को दीये की रौशनी में पढ़ना पड़ता है. वहीं इर्धन के इस्तेमाल में बायोमास के अलावा केरोसिन का उपयोग एकमात्र विकल्प है, जो महंगा भी है. यह आसानी से उपलब्ध भी नहीं है. स्वास्थ और पर्यावरण के खतरे पैदा करता है.
संस्था की सरकार की मदद भी करना चाहते है और इसकी पॉलिसी को आम लोग तक पहुंचाना चाहता है, ताकि आम आदमी तक रिन्यूएबल एनर्जी पहुंच सके. सूर्य की रोशनी, पानी, किचन वेस्ट से ऐसे उपकरण विकसित कर पाए, जिसमें बिजली पर ज्यादा निर्भर न रहे. ज्यादा से ज्यादा लोग रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल करें.

