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जंग का मैदान बना रघुवर दास की समीक्षा बैठक, हार पर समर्थकों का हंगामा, हुई हाथापाई

रांची: झारखंड विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री रघुवर दास ना तो वह सरकार बचा पाये, ना पार्टी को और ना ही अपनी सीट को. विधानसभा चुनाव में सरयू राय से मिली करारी हार के बाद रघुवर दास ने सोमवार को जमशेदपुर के एग्रीको स्थित सूर्य मंदिर में समर्थकों के साथ समीक्षा बैठक की. बैठक शुरू होते ही हंगामा से लेकर हाथापाई तक हो गयी.

जमशेदपुर एयरपोर्ट से सीधा रघुवर दास मंदिर पहुंचे, जहां बैठक शुरू होते ही रघुवर दास के करीबियों पर हार का ठिकरा फोड़ते हुए कार्यकर्ताओ ने हंगामा खड़ा कर दिया. एक-दूसरे पर आरोप लगाने के दौरान दो कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गये और हाथपाई तक कर ली. रघुवर दास और दूसरे नेताओं के बीच-बचाव से हाथापाई तो रुकी, लेकिन विरोध के स्वर तेज होते चले गये.

परिवारवाद के खिलाफ बोलने वाले रघुवर दास पर उनके समर्थकों ने उन्हीं पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. कार्यकर्ताओं ने कहा कि बीते पांच साल में रघुवर दास के रिश्तेदार पार्टी के अंदर हावी हो गये जिसके चलते कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा.

बैठक में एक कार्यकर्ता ने तो यहां तक कह दिया कि रघुवर दास को उनको अपने रिश्तेदारों की संपत्ति का आकलन करना चाहिए. रिश्तेदारों पर स्वार्थहित में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सभी रिश्तेदारों ने पार्टी में पद हासिल किया, टाटा स्टील में नौकरी ली लेकिन कार्यकर्ताओं से कभी सीधी जुबान से बात तक नहीं की.

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बैठक में कार्यकर्ताओं ने सीधे तौर पर रामबाबू तिवारी, मनिंदर चौधरी, पवन अग्रवाल, जिला अध्यक्ष दिनेश साहू समेत कई लोगों को तुरंत पद से हटाने की मांग रखी. बैठक में साफ तौर पर कहा गया कि अगर ये लोग अभी भी रघुवर दास के साथ बने रहेंगे तो जल्द ही कई कार्यकर्ता सरयू राय के खेमे में शामिल हो जायेंगे.

दो घंटे से ज्यादा की माथापच्ची के दौरान कई लोगों को रघुवर दास बैठक से जाने का आदेश भी देते रहे ताकि मसलों पर चर्चा शांति से हो सके.

बैठक के बाद रघुवर दास बाहर आये और पत्रकारों से बात करते हुए हार के लिए उनके खिलाफ किये गये दुष्प्रचार को जिम्मेदार ठहराया. उनका कहना था कि राज्य के विकास के लिए उन्होंने पांच साल जी-तोड़ मेहनत की, फिर भी विरोधियों को उनके खिलाफ दुष्प्रचार करने में कामयाबी मिली.

परिवारवाद को हार का कारण न मानते हुए रघुवर दास ने कहा कि उनके कार्यकर्ता को धमकी भरे कॉल किये जा रहे हैं. उनको डराया-धमकाया जा रहा है ताकि वो रघुवर का साथ छोड़ दें.

ऐसे लोगों को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि धमकी भरे कॉल से उनके कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं. आखिर में उन्होंने कहा कि उनके लिए राज्य का विकास हमेशा प्राथमिकता पर रहा है और हार के बाद भी उनका संधर्ष जारी रहेगा.


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