BnnBharat | bnnbharat.com |
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
BnnBharat | bnnbharat.com |
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसानों की सहायता के लिए 1917 में सत्याग्रह हुआ: रामेश्वर उरांव

by bnnbharat.com
September 27, 2020
in समाचार
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने हादसों पर शोक व्यक्त किया
Share on FacebookShare on Twitter

रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सह खाद्य आपूर्ति एवं वित्तमंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा 1917 के चंपारण सत्याग्रह ने पूरे देश में आजादी के आंदोलन को नई दिशा दिखाई, इसकी शुरुआत होती है तिनकठिया प्रथा यानी प्रति बीघा में तीन कट्ठा नील की खेती के ब्रिटिश फरमान के विरोध से, जिससे चंपारण के किसान तबाह हो रहे थे, साथ ही जर्मनी में पैदा होने वाले कृत्रिम नील के उत्पादन में यहां के किसानों पर दोहरी मार कर दी, ऐसी स्थिति में किसानों पर टैक्स का बोझ बढ़ता गया.

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष  डॉ रामेश्वर उरांव आज राष्ट्र निर्माण की अपने महान विरासत कांग्रेस की श्रृंखला धरोहर की तेरहवीं वीडियो को अपने सोशल मीडिया व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक एवं ट्विटर पर जारी पोस्ट को शेयर करने के उपरांत मीडिया कर्मियों से बातचीत के दौरान अपने उद्गार व्यक्त कर रहे थे. 

उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी से जूझता किसान दाने-दाने को मोहताज हो गया,बिहार के स्वाभिमानी किसान को जरूरत थी एक मजबूत नेतृत्व की,जिसको 1916 के कांग्रेस अधिवेशन में लिए गए पंडित राजकुमार शुक्ल के बुलावे पर महात्मा गांधी जी के चंपारण आगमन ने पूरा किया.

डा. रामेश्वर उरांव ने कहा चंपारण पहुंचते ही ब्रिटिश हुकूमत गांधीजी को धारा 144 का नोटिस थमा देती है, लेकिन गांधीजी सरकारी फरमानों से कहां डरने वाले थे,ब्रिटिश हुकूमत को फरमान वापस लेना पड़ा और इसके बाद गांधी जी ने गांव-गांव जाकर किसानों की पीड़ा देखी और उन्हें एकजुट किया. इस संघर्ष में राजेंद्र प्रसाद ,अनुग्रह नारायण सिन्हा , जे बी कृपलानी सहित बिहार के लाल राष्ट्रपिता बापू को मजबूती दे रहे थे. उसके बाद फिर जांच कमेटी गठित हुई और उसमें गांधीजी को शामिल किया गया. बापू के सत्याग्रह और बिहार की जिद के आगे ब्रिटिश हुकूमत को झुकना पड़ा. 4 मार्च 1918 को चंपारण अधिनियम पारित हुआ और तिनकठिया प्रथा समाप्त हो गई.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा बिहार की भूमि पर बापू के पहले सत्याग्रह की विजय का थम्ब अपने अंजाम पर पहुंच चुका था, चंपारण सत्याग्रह कहानी है मुश्किल वक्त में बिहार द्वारा देश को मार्ग दिखाने की. क्योंकि बाढ़ की अनगिनत थपेड़ों ,चमकी बुखार की भयावहता, प्रवासी मजदूरों की क्रंदन के बावजूद भी बिहार आज नए सवेरे का स्वागत करने के लिए खड़ा है. बिहार की इसी हिम्मत ने बापू को प्रेरणा दी,आज बिहार की यही हिम्मत देश को दिशा दे रही है. चंपारण सत्याग्रह की विजय को आजादी के महानायक के उदय की पहली किरण थी. अभी अंग्रेजी हुकूमत की परेशानियां कई गुना बढ़ने वाली थी क्योंकि दो महान हस्तियां गांधी जी की यात्रा को ताकत देने वाली थी.प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डा रामेश्वर उरांव आज राष्ट्र निर्माण की अपने महान विरासत कांग्रेस की श्रृंखला धरोहर की ग्यारहवीं वीडियो को अपने सोशल मीडिया व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक एवं ट्विटर पर जारी पोस्ट को शेयर करने के उपरांत मीडिया कर्मियों से बातचीत के दौरान अपने उद्गार व्यक्त कर रहे थे.

कांग्रेस विधायक दल नेता आलमगीर आलम ने कांग्रेस की धरोहर तेरहवीं वीडियो को अपने सोशल मीडिया हैंडल फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप,इंस्टाग्राम पर जारी करते हुए कहा कि भारतीय स्वतंत्रता इतिहास में गांधीजी के सत्याग्रह का यह पहला प्रयोग था बापू ने सत्याग्रह का जो बिगुल फेंका था वह काफी कारगर साबित हुआ तिनकठिया पद्धति भारतीय किसानों पर अत्याचार का जीता जागता प्रतीक है.

झारखंड सरकार में कांग्रेस के मंत्री बादल पत्रलेख एवं बन्ना गुप्ता ने धरोहर वीडियो को जारी करते हुए कहा भारत की जंगे आजादी के इतिहास में चंपारण सत्याग्रह को मील का पत्थर माना जाता है. इसी आंदोलन की वजह से देशवासियों ने बापू को महात्मा के तौर पर पहचान गांधी ने यहीं से अहिंसा को एक कामयाब विचार के रूप में बांधा. कांग्रेस पार्टी अपने बुजुर्गों और देश के लिए किए गए कार्यों को कभी जीते जी भूल नहीं सकती, आजादी पाने के लिए हमारे महान विभूतियों ने जो कुर्बानियां और बलिदान दी हैं इस धरोहर वीडियो के माध्यम से देश की जनता देख रही है .

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोर नाथ शाहदेव एवं डॉ राजेश गुप्ता छोटू ने अपने सोशल मीडिया के माध्यम से धरोहर वीडियो की तेरहवीं कड़ी को झारखंड की जनता के नाम समर्पित करते हुए कहा है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा धरोहर वीडियो की आज जारी तेरहवीं कड़ी में पूज्य बापू का पदार्पण महानायक के रुप में हुआ जिसने पूरी दुनिया में भारत वासियों की एक अलग पहचान बना दी.

राष्ट्रपिता ने देशवासियों के साथ मिलकर जो काम किया वह इतिहास के लिए भी और पूरी दुनिया के लिए अविस्मरणीय घटना है. कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा चंपारण के किसानों पर अंग्रेज तरह तरह से जुल्म ढाते थे करीब 40 प्रकार के टैक्स वसूल कर उनका लहू चूस लेते वही प्रति एक बीघा जमीन पर तीन कट्ठा जमीन में नील की खेती करनी पड़ती थी. अतीत का वह काला अध्याय आज भी चंपारण वासियों के जेहन में है जिस की लड़ाई बापू ने लड़ी और अंग्रेजों को घुटने टेकने पर मजबूर किया.

प्रदेश कांग्रेस कमेटी सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर गजेंद्र प्रसाद सिंह के नेतृत्व में हजारों कांग्रेस के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, विधायक ,सांसद,मंत्रियों ने धरोहर वीडियो को अपने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता के समक्ष प्रेषित किया है जो काफी ट्रेंड कर रहा है.

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window)
  • Click to share on X (Opens in new window)

Like this:

Like Loading...

Related

Previous Post

स्वास्थ्य सेवा की बदहाली, खाद्य सुरक्षा और मनरेगा के मुद्दे पर होगा आंदोलन: माकपा

Next Post

सड़क किनारे धंसी जमीन, गैस रिसाव से मची अफरा-तफरी

Next Post
सड़क किनारे धंसी जमीन, गैस रिसाव से मची अफरा-तफरी

सड़क किनारे धंसी जमीन, गैस रिसाव से मची अफरा-तफरी

  • Privacy Policy
  • Admin
  • Advertise with Us
  • Contact Us

© 2025 BNNBHARAT

No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

© 2025 BNNBHARAT

%d