आशा लकड़ा ने कहा- सरकार की कथनी और करनी में है फर्क
नौकरी में स्थाई करने की मांग को लेकर शनिवार से जमे हैं सहायक पुलिसकर्मी
न पीने के पानी की व्यवस्था और न खाने की, खुले आसमान के नीचे गुजार रहे हैं दिन और रात
SSP और CMO से पहले दिन ही वार्ता हो चुकी है असफल
रांची: सहायक पुलिसकर्मी के आंदोलन का रविवार को दूसरा दिन है. दूसरे दिन पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और रांची की मेयर आशा लकड़ा मोरहाबादी मैदान पहुंच सहायक पुलिसकर्मियों से बातचीत कर उनका हाल जाना.
इस दौरान मेयर आशा लकड़ा ने हेमंत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हेमंत सरकार की कथनी और करनी में फर्क है. हेमंत सरकार रोजगार देने की बात करती है, लेकिन हकीकत सामने है.
मेयर आशा लकड़ा ने आगे कहा कि पिछली सरकार ने वरीयता के आधार पर सहायक पुलिसकर्मियों के स्थायीकरण का आश्वासन दिया था. 31 अगस्त को सहायक पुलिसकर्मियों के संविदा की समयावधि समाप्त हो चुकी है, परंतु राज्य सरकार ने इनके संविदा विस्तार या स्थायीकरण की दिशा में कोई पहल नहीं की.
उन्होंने कहा कि एक ओर राज्य सरकार कोरोना काल में बेरोजगारों को रोजगार और बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा कर रही है. वहीं दूसरी ओर सहायक पुलिसकर्मियों की संविदा आधारित नौकरी को खत्म कर उन्हें बेरोजगार बना रही है. इससे स्पष्ट है कि राज्य सरकार की कथनी और करनी में अंतर है.
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को सहायक पुलिसकर्मियों के भविष्य को देखते हुए पूर्ववर्ती सरकार के दिशा निर्देशों का अनुपालन करना चाहिए.
बाबूलाल मरांडी भी मोरहाबादी मैदान पहुंचे-
बाबूलाल मरांडी मोरहाबादी पहुंचे और सहायक पुलिसकर्मियों उनका हाल जाना. सहायक पुलिसकर्मियों ने बताया कि वे पैदल चलकर अपने गृह जिला से यहां पहुंचे हैं, कई साथियों के पैर में छाले भी पड़ गए हैं.
सहायक पुलिसकर्मियों ने बाबूलाल को बताया कि हमारे साथ कुछ महिलाएं भी हैं, जिनके छोटे बच्चे हैं. न हमें पीने को पानी मिल पा रहा है और न ही खाने की कोई व्यवस्था है. हालांकि नगर निगम की ओर से मोरहाबादी मैदान में मोबाइल टॉयलेट वैन लगाए गए हैं जिससे महिलाओं को थोड़ी राहत है.
क्या कहते हैं सहायक पुलिसकर्मी
आंदोलनरत सहायक पुलिसकर्मियों का कहना है कि उनकी नियुक्ति पूर्व की रघुवर सरकार में 2017 में कॉन्ट्रैक्ट के बेस पर हुई थी. कहा गया था कि बाद में उन्हें परमानेंट कर दिया जाएगा. लेकिन अनुबंध समाप्त होने के बाद भी परमानेंट करने के लिए सरकार कोई प्रक्रिया नहीं अपना रही है, जिससे उन्हें मजबूरन आंदोलन करना पड़ रहा है.
आंदोलन के पहले दिन में क्या क्या हुआ था
बता दें कि आंदोलन के पहले दिन राज्यभर के 25सौ सहायक पुलिस कर्मियों को मनाने में डीआईजी-एसएसपी के अलावा 2 एसपी, 3 डीएसपी और 3 मेजर रैंक के अधिकारी शनिवार को दिनभर परेशान रहे, लेकिन सभी पूरी तरह से विफल रहे.
इसके बाद वार्ताकारों ने सहायक पुलिसकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल को सीएम से मिलवाने की बात कह कर साथ ले गए, लेकिन उन्हें डीआईजी-एसएसपी से मिलवा दिया. इससे सहायक पुलिसकर्मी नाराज हो गए और कहा कि उनके साथ छल किया गया है.

