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मॉनसून के मद्देनजर कृषि वैज्ञानिक की किसानों को सलाह
रांची: प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्र 79.714 लाख हेक्टेयर भूमि में से मात्र 28 लाख हेक्टेयर भूमि खरीफ फसलों की खेती होती है.18 लाख हेक्टेयर भूमि में केवल धान की खेती की जाती है, जो खेती योग्य जमीन का 70 प्रतिशत है.
धान के बाद मक्का, अरहर और उरद प्रमुख प्रमुख खरीफ फसल है. मॉनसून की बारिश शुरू हो चुकी है. आने वाले दिनों में लगातार बारिश होते रहने के आसार हैं. बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डॉ डीएन सिंह ने बारिश के मद्देनजर कई सुझाव दिये हैं.
प्रदेश की टांड़ (ऊपरी) जमीन में कम अवधि वाली धान की सीधी बुआई करें. मड़ुआ या अरहर या मक्का फसल को 30 जून तक लगा दें.
दोन -3 जमीन में धान की 110-115 जल्दी तैयार होने वाली किस्म जैसे– सहभागी, नवीन, अभिषेक, पीएसी -801, पीएसी – 807 तथा एराइज तेज में से किसी एक किस्म को लगाये.
दोन -2 जमीन में 129-130 दिनों वाली धान की किस्म जैसे – आईआर -64 डीआरटी -1, बिरसा विकास धान – 203, बिरसा विकास सुगंध -1, बिरसा मति व ललाट तथा हाइब्रिड किस्म पीएसी 801, एराईज -23 में से किसी एक किस्म की खेती की जा सकती है.
बारिश के प्रभाव से खेती प्रभावित होने की बात कही जाती है. प्रदेश में जून औसत वर्षापात 102 मिमी देखा गया है, जबकि इस वर्ष 18 जून तक 122 मिमी वर्षा हो चुकी है.
इतनी वर्षा टांड़ जमीन में खरीफ फसलों जैसे मक्का, अरहर, उरद , मूंग, रागी, ज्वार, बाजरा, सोयाबीन, मूंगफली व तिल आदि की खेती के बेहद अनुकूल है. किसानों टांड़ जमीन में इन फसलों की खेती 30 जून तक जरूर पूरी करें.
खरीफ फसलों के लिए मानसून के 105 दिनों (15 जून से 30 सितंबर) में केवल 500 से 600 मिमी वर्षा की जरूरत होती है. इतनी वर्षापात हर साल उपलब्ध होती है.
केवल समय से खेती, खाद एवं उर्वरक प्रयोग तथा रोग व कीट नियंत्रण में वैज्ञानिकों के सुझावों पर अमल से अच्छी पैदावार ली जा सकती है.

