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सुभाष चंद्र बोस जयंती: इस ऐतिहासिक जगह से क्रांतिकारियों में भरा था आजादी का जोश

नई दिल्ली:- भारत की आजादी में अहम योगदान देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक शहर में हुआ था. उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस था, वे वकील थे. उनकी माता का नाम प्रभावती था. उनकी मृत्यु 18 अगस्त 1945 को प्लेन दुर्घटना में हुई थी.आजादी से पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेरठ घंटाघर को बहुत याद किया करते थे. जी हां, बात उस समय की बात है जब नेताजी सुभाष चंद्रबोस देश की स्वाधीनता के लिए लोगों में जोश भरने मेरठ आए थे.उस दौरान उन्होंने शहर के बीचोंबीच स्थित घंटाघर को देखा था और उन्होंने तहेदिल से इसकी तारीफ की थी. इस घंटाघर की खास बात यह थी कि हर घंटे बाद इसके पेंडुलम की आवाज करीब दस किलोमीटर तक पहुंचती थी. इसका लोगों को फायदा भी होता था क्योंकि घंटे की आवाज सुनकर लोग समय का अंदाजा लगाते थे और अपना काम करते थे.इससे भी खास बात यह है कि इसका निर्माण 1913 में ब्रिटिश राज में हुआ था. इंग्लैंड से वेस्टन एंड वॉच कंपनी की घड़ी 1914 में लगाई गई थी. इसके बराबर में टाउन हॉल है. शहर के बीचोंबीच होने के कारण यहां पर सभाएं होती थी. नेताजी ने भी की थी सभा:-आपको बता दें कि 1930 के दशक में नेताजी सुभाष चंद्रबोस ने टाउन हॉल में एक जनसभा की थी जिस सभा में उन्होंने लोगों में जोश भरा था. खास बात यह थी कि बोस को सुनने के लिए लोग दूर- दूर से आए थे. कुछ बुजुर्ग लोगों का कहना है कि नेताजी को यह शहर बहुत पसंद आया था और उन्होंने तहेदिल से इसकी प्रशंसा की थी. यही नहीं बल्कि महात्मा गांधी और जवाहर नेहरू समेत कई बड़े नेताओं ने मेरठ में जनसभाएं की थी.