रांची: मंत्री शंकर प्रसाद ने जानकारी देते हुए बताया कि झारखंड का श्री राम नवमी महोत्सव 1926 में स्वर्गीय गुरु सहाय ठाकुर द्वारा हजारीबाग से शुरू किया. स्वर्गीय कृष्णलाल का ससुराल हजारीबाग था वहां पर उन्होंने रामनवमी महोत्सव को देखा रांची आकर अपने भाई डॉ. रामकृष्ण लाल के साथ विचार विमर्श कर जागो राम नेमन साहू एवं चंद व्यक्तियों के सहयोग से 1929 में बजरंगबली हनुमान मंदिर (महावीर चौक) से रामनवमी महोत्सव का शुभारंभ किया गया. धीरे-धीरे यह रामनवमी महोत्सव झारखंड राज्य के हर जिला हर महानगर हर गली मोहल्ले में विस्तार हो गया. छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्से में भी झारखंड की तरह ही रामनवमी महोत्सव आयोजित किया जाता है.
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1938 में श्री राम नवमी सिंगार समिति का गठन किया गया. इनके संस्थापक स्वर्गीय मुरली महाराज थे. रांची का प्रथम रामनवमी शोभा यात्रा महावीर चौक हनुमान मंदिर से तपोवन मंदिर गए थे इसे लोग पागलों की टोली कहते थे. आज यह पागलों की टोली 6 लाख में तब्दील हो चुका है. रामनवमी के इतिहास में वायरस को लेकर 283 साल बाद पहली बार तपोवन मंदिर का मुख्य द्वार आम राम भक्त श्रद्धालुओं के लिए बंद किया गया. महंत एवं पुजारी सांकेतिक रूप से पूजा पाठ किया.
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श्री रामनवमी शोभा यात्रा का 1929 में तपोवन मंदिर के महंत बंकटेशवरदास ने झंडे का पूजन किया था उसी समय से यह परंपरा शुरू हुआ रामनवमी के इतिहास में 1838 में स्थापित बजरंगबली हनुमान मंदिर महावीर चौक का पट राम भक्तों के लिए पहली बार 2 अप्रैल 2020 नवमी के दिन बंद रहा साथ ही समस्त झारखंड की राजधानी रांची महानगर में मंदिरों का पट बंद रहा. समस्त राम भक्त अपने-अपने घरों में पूजा पाठ कर भारत सरकार राज्य सरकार एवं स्थानीय प्रशासन के दिशा निर्देश को पूरी तरह पालन किए. श्री महावीर मंडल के अध्यक्ष सागर वर्मा एवं मंत्री शंकर प्रसाद ने श्री राम नवमी महोत्सव के अष्टमी, नवमी, दशमी के समस्त कार्यक्रमों को स्थगित कर अपने-अपने घरों में पूजा पाठ किए एवं स्थानीय प्रशासन को पूर्ण सहयोग दिए. साथ हजारीबाग, गुमला, लोहरदगा, चतरा, डालटेनगंज, जमशेदपुर सहित समस्त झारखंड वासियों ने रामनवमी महोत्सव को स्थगित कर राष्ट्रहित में राष्ट्रीय आपदा को देखते हुए अपने-अपने घरों में पूजा पाठ कर एक सराहनीय कदम उठाए हैं. हम उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं और समस्त हिंदू राम भक्तों के प्रति भी आभार व्यक्त करते हैं. साथ ही उनसे प्रार्थना करते हैं की जब तक सरकार का दिशानिर्देशों है समस्त हिंदू समाज अपने आपको अपने परिवार को अपने समाज को अपने राज्य को अपने राष्ट्र को बचाने के लिए अपने अपने घरों तक ही सीमित रहें.

