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जिस अफसर ने मुंबई की कंपनी को बिना टेंडर व डीपीआर के दिया 3.64 करोड़ का काम, खुद उसकी कर रहे जांच, मामले को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी

by bnnbharat.com
October 19, 2019
in समाचार
जिस अफसर ने मुंबई की कंपनी को बिना टेंडर व डीपीआर के दिया 3.64 करोड़ का काम, खुद उसकी कर रहे जांच, मामले को ठंडे  बस्ते में डालने की तैयारी

The officer, who gave the Mumbai company work of 3.64 crores without tendering and DPR, investigating himself, preparing to put the cases in cold storage

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रांचीः बिरसा जैविक उद्यान में एक्वेरियम लगाने में हुई अनियमितता के मामले को अब ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी की जा रही है. यह मामला लोकायुक्त के पास भी लंबित है. इस पर तत्कालीन पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ लाल रत्नाकर सिंह ने राज्य सरकार और पीसीसीएफ हेड ऑफ फोर्स को रिपोर्ट भी सौंपी थी. बावजूद इसके अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.

क्या है मामला

तत्कालीन पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्वेरियम के टेंडर में दो लोगों ने हिस्सा लिया था. इसमें मुंबई की कंपनी उतेकर ने एक्वेरियम निर्माण के लिये 36462816 रुपये का रेट दिया था. इसके बाद निर्माण करने वाली कंपनी ने निर्माण के बाद एक साल देखरेख करने के लिये 3816760 रुपये का रेट दिया था. दूसरी बंगलुरु की कंपनी ने स्टील वाटर एक्वाटिक्स ने निर्माण के लिये 38706885 रुपये का रेट दिया था.जबकि निर्माण के बाद एक साल देखरेख के लिए 46 लाख रुपये का रेट दिया था.

कहां हुई थी अनियमितता

बिरसा जैविक उद्यान के तत्कालीन निदेशक अशोक कुमार ने एक्वेरियम का काम बिना टेंडर के मुंबई की कंपनी उतेकर को दे दिया. इस काम के लिए न डीपीआर बना और न ही प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति मिली. झारखंड चिड़ियाघर प्राधिकरण से भी इसकी अनुमति नहीं मिली. अशोक कुमार ने नियमों को ताक में रखकर मुंबई की कंपनी उतेकर को 36462816 रुपये का काम दे दिया.

कैसे ठंढ़े बस्ते में डालने की है तैयारी

अशोक कुमार वर्तमान में सीसीएफ गजेटेड हैं और इस हिसाब से सारी फाइलें उन्हीं के पास हैं. इस अनियमितता की भई फाइल वे खुद ही देख रहे हैं. हालांकि यह मामला भी लोकायुक्त के पास लंबित है. सीसीएफ रैंक के अफसर अशोक कुमार दिसंबर 2017 तक बिरसा जैविक उद्यान में निदेशक के पद पर थे. फिलहाल वे सीसीएफ गजेटेड (राजपत्रित) के साथ जरेडा के अतिरिक्त प्रभार में भी हैं.

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