रांची: मध्यस्थता केन्द्र में आयोजित पांच दिवसीय विशेष मध्यस्थता अभियान के पहले दिन परिवार न्यायालय एवं विभिन्न न्यायालयों से 37 मामले अग्रसारित होकर मध्यस्थता केन्द्र में आये जिन्हें भिन्न-भिन्न मध्यस्थ को सुपुर्द किया गया. इनमें 11 मामलों में सफलता मिली और दोनों पक्ष राजी-खुशी से अपने मामले को समाप्त करने के लिए तैयार हो गये. अन्य मामलों में अभी अंतिम स्तर की बातचीत बाकी है. वे मामले विशेष मध्यस्थ के पास अगले स्तर के सुनवाई के लिए लंबित है.
ज्ञात हो कि इस विशेष मध्यस्थता अभियान में 37 मामले रेफर किये गये थे, जिसमें 11 मामलों को मध्यस्थता केंद्र, रांची के द्वारा सफलतापूर्वक सुलझाया गया.
मध्यस्थता के दौरान निस्तारित होनेवाले मामलों में एक मामला प्रमुख रहा. वाद संख्या ओ.एस. 55/2019 जो कि प्रेमलता त्रिपाठी के न्यायालय से मध्यस्थता केंद्र, रांची में मध्यस्थता के लिए भेजा गया था. उक्त वाद को मध्यस्थता के लिए अधिवक्ता मध्यस्थत नीलम शेखर को सौंपा गया जिसमें दोनों पक्ष आपस में पति-पत्नी है. पति द्वारा तलाक के लिए न्यायालय में तलाक के लिए आवेदन दाखिल किया गया था परंतु मध्यस्थता में आने के बाद मध्यस्थता की प्रक्रिया के तहत बैठक होने के पश्चात दोनों पक्षों में बातचीत होने के बाद विवाह की पुनर्स्थापना हुई, जिसमें दोनों पति-पत्नी साथ जीने मरने की कसम खायी. इस बात का प्रण लिया कि एक साथ मिलकर अपने पुत्र हर्ष (पांच वर्ष) का पालन पोषण कर उसका भविष्य उज्ज्वल करेंगे. इस प्रकार तालक का वाद मध्यस्थता के माध्यम से नीलम शेखर के द्वारा विवाह पुनर्स्थापन में बदला.
मालूम हो कि विशेष मध्यस्थता अभियान का आज प्रथम दिन है. कार्यक्रम 16 से 20 मार्च तक चलेगा. झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश डॉ. रवि रंजन, झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायधीश हरिशचंद्र मिश्रा, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष न्यायधीश अपरेश कुमार सिंह के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा इसका आयोजन किया गया था.

