रांची: राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी फिर भाजपा के हो गये. रांची के प्रभात तारा मैदान में सोमवार को आयोजित समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में उनकी पार्टी झारखंड विकास मोर्चा का विलय हुआ. इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम प्रकाश माथुर, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, प्रदेश संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, कड़िया मुंडा, सुदर्शन भगत, बीडी राम, विरंची नारायण, अर्पणा सेनगुप्ता सहित अन्य मौजूद थे.
पहले मुख्यमंत्री थे बाबूलाल
झारंखड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी थे. सोमवार लगभग 14 साल बाद बीजेपी में उनकी वापसी हो गई. बाबूलाल की घर वापसी के बाद झारखंड में बीजेपी की सियासत में आमूल-चूल बदलाव हो सकता है. राज्य में एक अदद आदिवासी चेहरे की तलाश कर रही बीजेपी को बाबूलाल मरांडी के रूप में पुन: ऐसा नेता मिल गया है, जिसकी जड़ें संघ से जुड़ी है. जो झारखंड की राजनीति का जाना-माना नाम है.
रांची में हुआ वृहत कार्यक्रम
बाबूलाल मरांडी की घर वापसी को लेकर रांची में वृहत कार्यक्रम हुआ. इस कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी उपाध्यक्ष ओम माथुर मौजूद रहे. इन दोनों दिग्गजों की मौजूदगी में बाबूलाल ने जेवीएम का चुनाव चिह्न कंघी से कमल की ओर प्रस्थान किया. जेवीएम अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी अपनी पार्टी झारखंड विकास मोर्चा के बीजेपी में विलय की घोषणा पहले ही कर चुके हैं. बाबूलाल मरांडी आज औपचारिक रूप से एक बार फिर से उसी दल में आ गये, जहां से उन्होंने राजनीति का ककहरा सीखा था.
2006 में भाजपा से हुए थे अलग
झारखंड गठन के साथ ही 15 नवंबर 2000 को बाबूलाल मरांडी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने थे. राज्य के मुखिया के रूप में ये उनकी पहली पारी थी, बाबूलाल को यहां जबर्दस्त गुटबाजी का सामना करना पड़ा. मात्र 28 महीने बाद उन्हें कुर्सी छोड़नी पड़ी थी. बाबूलाल मरांडी के बाद भारतीय जनता पार्टी के ही अर्जुन मुंडा प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री बने थे. इस बीच दोनों नेताओं के बीच गुटबाजी की खबरें भी आती रही. इस दौरान झारखंड में ट्राइबल बनाम गैर ट्राइबल की आदिवासी लड़ाई चलती रही.
कोडरमा से चुनाव जीता
2004 में जब बीजेपी केंद्र की सत्ता से बाहर हो गई, तब बाबूलाल मरांडी ने कोडरमा लोकसभा सीट से चुनाव जीता. बाबूलाल मरांडी का राज्य नेतृत्व से विवाद बढ़ता गया. कई बार उन्होंने अपनी ही पार्टी की सरकार की आलोचना की. 2006 आते-आते बाबूलाल बीजेपी में उबने लगे. उन्होंने कोडरमा लोकसभा सीट और बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. झारखंड विकास मोर्चा का गठन किया. तब भाजपा के 5 विधायक भी उनके साथ उनकी पार्टी में शामिल हुए. बाद में कुछ ने बीजेपी में वापसी कर ली.
निर्दलीय के रूप में जीते
इसके बाद बाबूलाल मरांडी कोडरमा लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े और जीत हासिल की. 2009 लोकसभा चुनाव में वे जेवीएम के टिकट पर कोडरमा से चुनाव लड़े और एक बार फिर जीते.
राज्य में नहीं जमा सके धाक
झारखंड के पहले सीएम बनने वाले बाबूलाल मरांडी राज्य की सियासत में अपनी धाक नहीं जमा पाए. झारखंड का किंगमेकर बनने का सपना लिए बाबूलाल इसे धरातल पर नहीं उतार पाए. झाविमो के गठन के बाद दो बार पार्टी का प्रदर्शन निर्णायक रहा. 2009 में पहली बार 11 विधायकों के साथ राज्य में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई.
2014 में दो सीटों से हारे
2014 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने एकला चलो की राह अपनाई और उनके 8 विधायक जीते. हालांकि मोदी लहर और राज्य में बीजेपी की सरकार बनने के बाद उनके 6 विधायक भाजपा में शामिल हो गए. 2014 का विधानसभा चुनाव बाबूलाल के लिए दुस्वपन जैसा रहा. इस इलेक्शन में वे दो विधानसभा सीट राजधनवार और गिरिडीह से किस्मत आजमा रहे थे, लेकिन वे दोनों ही सीटों से हारे.
विरोधियों को किया था किनारे
झाविमो के भाजपा में विलय से पहले उन्होंने विरोधियों को किनारे लगा दिया था. झाविमो के टिकट पर जीते प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को पार्टी से निष्कासित कर दिया था. झाविमो की नवगठित कार्यकारिणी में प्रस्ताव लाकर विलय को मंजूरी दे दी थी.

