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बजट के दौरान इन शब्दों का होता है इस्तेमाल, क्या आपको है मालूम…..

by bnnbharat.com
February 1, 2021
in समाचार
बजट सत्र से संबंधित विभिन्न विभागों के मंत्रियों को प्रश्नोत्तर के लिए किया गया प्राधिकृत
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हैदराबाद: वित्त वर्ष 2021-22 का बजट केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश कर दिया है. यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का तीसरा बजट है. यह बजट बाकी के सालों के मुकाबले काफी खास है. वजह देश में फैली कोरोना महामारी के बाद आए आर्थिक संकट ने इस बजट और भी महत्वपूर्ण बना दिया है. इस पर पूरे देश के लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं. पूर्ण बजट पेश के दौरान कई ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है जिसके बारे में कई लोगों को पता नहीं हैं. इसलिए हम आपकी सुविधा के लिए बजट से जुड़े कुछ ऐसे शब्दों के बारे में बता रहे हैं जो आपको जानना जरूरी है ताकि आपको इसे समझने में मदद मिल सके.

पहली बार कब उपयोग में आया बजट शब्द

बजट पर बातें करने से पहले यह जान लेते है कि आखिर बजट शब्द पहली बार उपयोग में कब आया. दरअसल बजट शब्द का सबसे पहले 1733 में उपयोग किया गया. बजट सरकार की इनकम और खर्च का एक विवरण प्रपत्र होता है. जिसमें आने वाले साल के आय-व्यय के अनुमानित आंकड़े, सामाजिक-आर्थिक कार्यक्रम तथा आय में वृद्धि तथा व्यय में कमी करने के उपाय होते हैं.

क्या होती है जीडीपी?

बजट के लिहाज से जीडीपी बजट के लिहाज सबसे अहम शब्द है. जीडीपी किसी भी देश के आर्थिक सेहत को मापने का पैमाना है. देश के भीतर एक वित्त वर्ष में कितने वैल्यू की गुड्स और सर्विस पैदा की गई उसे जीडीपी कहते हैं. देश में इसके तीन घटक हैं. पहला एग्रीकल्चर दूसरा इंडस्ट्री और तीसरा सर्विसेज़ जिनमें उत्पादन बढ़ने या घटने के औसत आधार पर जीडीपी दर तय होती है. भारत में जीडीपी की गणना हर तीसरे महीने होती है.

फिस्कल डेफिसिट ( राजकोषीय घाटा)

यह सरकार के कुल खर्च और उसकी कमाई के बीच का अंतर है. अगर सरकार खर्चे उसके कमाई से ज्यादा हो जाते हैं तो उसे फिस्कल डेफिसिट या राजकोषीय घाटा कहते हैं.

इन्फ्लेशन यानी महंगाई दर

जब किसी देश में प्रोडक्ट्स या सर्विसेस की कीमतें सामान्य से अधिक हो जाती हैं तो इस स्थिति को महंगाई (Inflation) कहते हैं. वहीं अगर महंगाई दर की बात करें तो एक निश्चित समय में चुनिंदा वस्तुओं या सेवाओं के मूल्य में जो वृद्धि या गिरावट आती है, उसे मुद्रास्फीति कहते हैं. इसे जब प्रतिशत में व्यक्त करते हैं तो यह महंगाई दर कहलाती है. सरल शब्दों में कहें तो यह कीमतों में उतार-चढ़ाव की रफ्तार को दर्शाती है. यही वजह है कि कई बार थोक या खुदरा महंगाई की दर धीमी होने पर भी बाजार में कीमतों में गिरावट नहीं आती.

वित्त विधेयक

सरकार इस विधेयक में संसद के समक्ष नए कर लगाने, वर्तमान कर ढांचे में परिवर्तन या वर्तमान कर ढांचे की निरंतरता के लिए प्रस्ताव रखती है. बिल में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के लिए प्रस्तावित संशोधन शामिल हैं.

प्रत्यक्ष कर

व्यक्ति की आय पर लगने वाला कर प्रत्यक्ष कर है. इस कर का भुगतान सीधे सरकार को किया जाता है. इनमें इनकम टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स और इनहेरिटेंस टैक्स शामिल हैं.

अप्रत्यक्ष कर

प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के बीच अंतर आसानी से किया जा सकता हैं. अप्रत्यक्ष कर वस्तुओं और सेवाओं पर लगाया जाता है जबकि प्रत्यक्ष कर आय पर लगाया जाता है और मीडिएटर के जरिए इसका भुगतान किया जाता है. अप्रत्यक्ष करों की निगरानी का कार्य केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड करता है.

राष्ट्रीय कर्ज (नेशनल डेट)

यह केंद्र सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज है. यह कर्ज सरकार को चुकाना होता है. आम तौर पर सरकार पहले के बजट घाटे को पूरा करने के लिए यह कर्ज लेती है.

सेनवैट

यह केंद्रीय वैल्‍यू एडेड टैक्‍स है, जो मैन्युफैक्चरर पर लगाया जाता है. यह पहली बार साल 2000-2001 में पेश किया गया था.

मौद्रिक नीति (मॉनिट्री पॉलिसी)

भारतीय रिजर्व बैंक की इस नीति के जरिये अर्थव्यवस्था में पैसे की सप्लाई और ब्याज दरों पर फैसला लिया जाता है. इसका अर्थव्यवस्था पर सीधा असर होता है. अर्थव्यवस्था में लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए इसका इस्तेमाल होता है. महंगाई, बैलेंस ऑफ पेमेंट और रोजगार के स्तर में इसकी भूमिका अहम होती है.

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