नई दिल्ली: कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 51वां दिन है. हड्डियां गला देने वाली ठंड और बारिश के बीच डटे किसान किसी कीमत पर अपनी मांगें बिना मनवाए वापस जाने के मूड में नहीं हैं. इन सबके बीच आज किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच बैठक होने जा रही है.
यह बैठक ऐसे समय होने जा रही है जब सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच बने गतिरोध को तोड़ने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन कर दिया है. इसलिए पूर्व निर्धारित नौवें दौर की वार्ता को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी. हालांकि, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने गुरुवार को बताया कि बैठक होगी, जिसमें सकारात्मक नतीजे की पूरी उम्मीद है.
गौरतलब है कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले को सुलझाने के लिए 4 सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है. लेकिन किसानों का कहना है कि वो कमेटी के सामने हाजिर नहीं होंगे. किसानों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कमेटी गठित करने के बाद सरकार से बातचीत का कोई मतलब नहीं रह जाता है.
इससे पहले कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के नेतृत्व में तीन मंत्रियों की समिति किसान यूनियन के साथ बातचीत कर रही थी. सरकार और किसानों के बीच 9 दौर की बातचीत के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकला था. पिछली बार 8 जनवरी को हुई बैठक में दोनों पक्ष 15 जनवरी को बातचीत को लेकर सहमत हुए थे.
किसान 26 जनवरी के अपने प्रस्तावित ‘किसान परेड’ के कार्यक्रम पर अमल करने और दिल्ली कूच करने पर अड़े. संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा घोषित आंदोलन के कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है. 18 जनवरी को महिला किसान दिवस मनाने, 20 जनवरी को श्री गुरु गोविंद सिंह की याद में शपथ लेने और 23 जनवरी को आजाद हिंद किसान दिवस पर देश भर में राजभवन का घेराव करने का कार्यक्रम जारी रहेगा.
आपको बता दें कि कड़ाके की सर्दी और गिरते पारे के साथ-साथ कोरोना के खतरों के बीच 26 नवंबर से बड़ी तादाद में किसान दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर डटे हैं. लेकिन किसान और सरकार के बीच अबतक इस मसले पर अबतक कोई सहमति नहीं बन पाई है. बड़ी तादाद में प्रदर्शनकारी किसान सिंधु, टिकरी, पलवल, गाजीपुर सहित कई बॉर्डर पर डटे हुए हैं. इस आंदोलन की वजह से दिल्ली की कई सीमाएं सील हैं.

