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धनबाद में 3000 लोगों पर दर्ज राजद्रोह की धारा निरस्त

सीएए, एनआरसी व एनआरपी के विरूद्ध प्रदर्शन को लेकर सात नामजद व 3000 अज्ञात लोगों के विरूद्ध दर्ज हुई थी प्राथमिकी

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रांची: झारखंड के धनबाद में सीएए, एनआरसी व एनआरपी के विरूद्ध प्रदर्शन को लेकर मंगलवार को स्थानीय थाने में सात नामजद और 3000 अज्ञात लोगों के विरूद्ध विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था और इनके खिलाफ राजद्रोह का भी धारा लगाया गया था. भाकपा-माले विधायक विनोद कुमार सिंह ने राजद्रोह की धारा लगाने पर आपत्ति जतायी, जिसके बाद धनबाद के नगर पुलिस अधीक्षक ने राजद्रोह के धारा को हटाने की जानकारी दी है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि धनबाद में तीन हजार लोगों पर लगाये गये राजद्रोह की धारा को अविलंब निरस्त करने का आदेश दे दिया गया है. साथ ही साथ दोषी अधिकारी के खिलाफ समुचित कार्रवाई की अनुशंसा भी कर दी गयी है. उन्होंने कहा कि कानून जनता को डराने या उनकी आवाज दबाने के लिए नहीं, बल्कि आम जन मानस में सुरक्षा का भाव उत्पन्न करने को होता है. हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर कहा कि उनके नेतृत्व में चल रही सरकार में कानून जनता की आवाज को बुलंद करने का कार्य करेगी. साथ ही उन्होंने सभी राज्यवासियों से अपील की कि यह राज्य सभी का है, यहां के कानून व्यवस्था का सम्मान करना सभी का कर्त्तव्य है.

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इधर, धनबाद के सिटी एसपी ने विधायक विनोद कुमार सिंह को पत्र लिखकर जानकारी दी है कि धनबाद थाना में कांड संख्या 12/2000 में धारा 143, 147, 149, 186, 188, 290, 291, 328 और 153 ए तथा 124 ए लगाया गया था. इस संबंध में उनकी ओर से ध्यान दिलाने पर प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि इस कांड में भादवि की धारा 124 ए लगाना न्यायोचित नहीं है, इसलिए इस धारा को विलोपित करते हुए अदालत में अविलंब शुद्धिपत्र समर्पित किया जाएगा.

धनबाद सिटी एसपी ने इस संबंध में धनबाद थाना के थाना प्रभारी संतोष कुमार को भी कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए इस कांड में धारा 124 ए का भी समावेश किये जाने का कोई औचित्य प्रतीत नहीं होता है.

उन्होंने कहा कि मामले में ऐसा जान पड़ता है कि उनके द्वारा प्राथमिकी के आवेदन को गहराई से बिना अवलोकन के ही कांड पंजीकृत कर लिया गया, यह घोर लापरवाही, मनमानेपन, स्वच्छाचारिता और अयोग्य पुलिस पदाधिकारी होने का परिचायक है,इसलिए इस त्रुटि के लिए अपना स्पष्टीकरण तीन दिनों के अंदर समर्पित करें. साथ ही उन्हें यह भी चेतावनी दी गयी है कि ससमय स्पष्टीकरण समर्पित नहीं होने पर उनके विरूद्ध अनुशासनिक कार्रवाई आरंभ की जाएगी.

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