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वायरल वीडियो का खुलासा, जनाब यह घास नहीं साग है

by bnnbharat.com
April 14, 2020
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वायरल वीडियो का खुलासा, जनाब यह घास नहीं साग है

वायरल वीडियो का खुलासा, जनाब यह घास नहीं साग है

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जमशेदपुर: एक तरफ कोरोना महामारी के दौर में तमाम देशवासी एक दूसरे की ओर मदद का हथ बढ़ा रहे है, वहीं दूसरी ओर कुछ गंदी मानसिकता के लोग गरीबों की मजाक सोसल मीडीया पर सूचनाएं वायरल कर सरकार और प्रशासन को बनदाम करने में लगे है. पूरा मामला झारखंड के जमशेदपुर का है. जहां पिछले दिन सोसल मीडिया पर भाजपा नेता कृष्णा पात्रो द्वारा एक आदिवासी महिला का खाना बनाते हुए एक वीडिओ वायरल किया गया, जिसमें यह बताया गया कि लॉकडाउन के कारण महिला और उसका परिवार आर्थिक तंगी में घास की सब्जी बनाकर अपना और अपने बच्चों का पालन करने को मजबूर है. बताया जा रहा है कि महिला बागबेड़ा के सोमई झोपड़ी का रहने वाली अनिता मुंडारी है.

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उधर पूरा मामला उस वक्त पैनिक हो गया जब वायरल वीडियो को सही मानकर राष्ट्रीय चैनल ने भी अपने यहां प्रमुखता से इस खबर को चला दिया, जिसका लिंक झारखंड के जामताड़ा विधायक इरफान अंसारी ने सीएम हेमंत सोरेन को ट्ववीट् करते हुए मामले पर संज्ञान लेने की नसीहत दी थी. वैसे सीएम ने TWEET करते हुए जिले के उपायुक्त से पूरे मामले पर रिपोर्ट तलब कर दिया.

पूरे मामले की जानकारी लेने के महिला से पूछने पर जानकारी मिली अनीता मुंडारी एक आदिवासी महिला है, जो घास नहीं बल्कि भोर साग बना रही थी. जो खेतों में घासों के बीच झाड़ियों में उगता है. आम लोग इसे घास मान सकते हैं. लेकिन वास्तव में वह भोर साग है जिसे आदिवासी समाज के लोग खाते है. यह साग काफी जायकेदार भी होता है. वैसे स्थानीय मुखिया लक्ष्मी सोय से जानने का प्रयास किया कि क्या वाकई महिला के घर राशन पानी की दिक्कत है. उन्होंने बताया तीन दिन पहले ही आदिवासी महिला अनीता मुंडारी को 10 किलो अनाज दिया गया था. तो क्या इस पूरे मामले को साजिश के तहत क्रिएट किया गया. मुखिया की छवि को धुमिल करने का प्रयास किया जा रहा है. वहीं इस मामले पर स्थानीय आंगनबाड़ी सेविका और स्थानीय लोगों से भी जानने का प्रयास किया गया कि आखिर पूरा माजरा क्या है, क्या वाकई महिला घास खा रही था या कुछ और.

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वैसे इस पूरे प्रकरण में झारखंड सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए जमशेदपुर उपायुक्त रविशंकर शुक्ला को मामले पर संज्ञान लेने का फरमान जारी कर दिया है. जहां प्रसासन की ओर से महिला को अन्य जरूरी सामन भी उपलब्ध करा दिया है लेकिन बड़ा सवाल ये है, कि आखिर मामले को इस वैश्विक संकट के दौर में पैनिक क्यों किया गया. वहीं पूरे मामले पर जिला प्रशासन के पक्ष का अभी इंतजार है, लेकिन संकट के इस घड़ी में क्या ऐसा कृत्य शोभा देता है. वैसे पूरे मामले की जांच सरकारी और प्रशासनिक स्तर पर बेहद जरूरी है. साथ ही दोषियों पर कार्रवाई भी जरूर होनी चाहिए. वैसे पूरे मामले में जांच के बाद जानकारी मिली यह घास नहीं बल्कि भोर साग है.

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