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CAA पर शाहीन बाग को समझाएंगे वजाहत हबीबुल्ला

by bnnbharat.com
February 18, 2020
in समाचार
CAA पर शाहीन बाग को समझाएंगे वजाहत हबीबुल्ला

CAA पर शाहीन बाग को समझाएंगे वजाहत हबीबुल्ला

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नई दिल्लीः सीएए को लेकर पिछले दो महीने से धरने पर बैठे शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से बातचीत हेतू सुप्रीम कोर्ट ने जिन तीन लोगों को नियुक्त किया, उनमें एक नाम है वजाहत हबीबुल्लाह का। वजाहत हबीबुल्लाह रिटायर्ड आईएएस, पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष हैं.

5 अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी करते हुए उसे दो हिस्सों में बांटकर दोनों को केंद्रशासित प्रदेश घोषित कर दिया तो वजाहत हबीबुल्लाह ने इसका मुखर विरोध किया. उन्होंने इस फैसले को अदूरदर्शी और मूखर्तापूर्ण करार देते हुए केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की थी.

उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार के इस फैसले जम्मू-कश्मीर में आंतकवाद पर कैसे लगाम लगेगी, यह समझ से परे है। उन्होंने कहा था, ‘ऐसा करके आप लोगों की ताकत घटा रहे हैं. बताते चलें कि हबीबुल्लाह 26 अक्टूबर, 2005 को वह देश के पहले मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) की जिम्मेदारी संभाली थी.

इस पद पर वह 19 सितंबर 2010 तक रहे थे. वह 1968 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी थे.अगस्त 2005 में रिटायर होने के बाद उन्हें संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के पहले कार्यकाल में सीईसी का पद दिया गया था.

सीईसी के कार्यभार से मुक्त होने के बाद उन्हें राष्ट्रीय अल्पसंख्य आयोग का अध्यक्ष बनाया गया. उन्होंने 3 फरवरी, 2011 को यह पद ग्रहण किया और फरवरी 2014 तक बने रहे.उन्होंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को लेकर बनी इस धारणा का खंडन किया था कि अल्पसंख्यकों के हित में दखल देने के लिहाज से आयोग के पास कोई शक्ति नहीं है.

उन्होंने तब कहा था, ‘आयोग के पास कुछ अधिकार हैं और अतीत में इसने कई महत्वपूर्ण बातें सरकार के ध्यान में लाई हैं. वह केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय में सचिव भी रह चुके हैं. साल 1991 से 1993 के बीच हबीबुल्लाह तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य के कश्मीर डिविजन के आठ जिलों के डिविजनल कमिश्नर रहे थे.

उन्होंने राज्य में एक नौकरशाह के रूप में काम के अनुभवों को समेटकर कश्मीर पर तीन किताबें लिखीं. आतंकवादियों ने जब हजरतबल दरगाह पर कब्जा जमा लिया तो वजाहत उनसे बातचीत करने पहुंच गए. इसी दौरान एक गंभीर सड़क हादसे के शिकार हो गए और उनकी सर्विस अचानक समाप्त कर दी गई. जुलाई 2010 में उन्हें वर्ल्ड बैंक की ‘इन्फो अपील बोर्ड’ का सदस्य नियुक्त किया गया था.

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