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हम बेशक लड़खड़ा जाएं, पर अर्थव्यवस्था नहीं लड़खड़ाने देंगे…

by bnnbharat.com
May 20, 2020
in Uncategorized
हम बेशक लड़खड़ा जाएं, पर अर्थव्यवस्था नहीं लड़खड़ाने देंगे…
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विपिन दुबे,

रामू बहुत ही गरीब और मेहनतकश मजदूर है. दिन भर मजदूरी करके शाम को जब घर लौटता तब चंद रुपयों से आटा; तेल; नमक लाकर पत्नी और दो मासूम बच्चों को 2 जून की रोटी जुटा पाता.

कोरोना महामारी के चलते करीब डेढ़ महीने से लॉकडाउन के कारण रामू की मजदूरी बंद है. परिवार की गुजर-बसर के लिए सरकार से मुफ्त में राशन मिल गया. समाजसेवियों से दो वक्त की रोटी की जुगाड़ हो गई. लेकिन सुरा के आदि रामू को लगभग 45 दिन से शराब नहीं मिली क्योंकि मधुशाला बंद है.

इतने दिनों तक शराब ना मिलने से रामू ने तो हालातों से समझौता कर लिया; उसने शराब नहीं पी. हां साहब- जब मिलेगी ही नहीं तो पिएंगे कहां से; लेकिन इस बीच रामू के मित्र रामलाल, धनुलाल, पन्नालाल, सोहनलाल सहित कई हमजोलीयों ने बताया शराब दुकान बंद होने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई है. सरकार के खजाने खाली हो गए हैं. बस फिर क्या था? रामू को अपने भूखे परिवार से ज्यादा.

प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी चिंता सताने लगी वह सुबह-शाम ईश्वर से यही दुआ करता हे भगवान! शराब की दुकानें खुल जाएं वरना प्रदेश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई तो क्या होगा? सच्चे मन से मांगी गई रामू की मनौती पूरी हो गई. फिर क्या रामू जैसे कई रामू देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए चाहे उधार; चाहे जुगाड़ जैसे भी मिले रुपए लेकर मधुशाला की ओर दौड़ पड़े.

सुबह से बाकायदा पुलिस के पहरे में सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए 5-5 घंटे खड़े रहे. औसतन 24 घंटे में लाखों रुपए की शराब रामू जैसे देश के चहेतों ने हलक में उतार ली. रामू भी बहुत ओवरडोज होकर शाम को जब घर लौटा तो उसकी पत्नी ने कहा- आप शराब पीकर आ गए.

सुबह से खाना नहीं बना. बच्चे भूखे हैं; तुम्हें इनकी चिंता नहीं है जो पैसे तुम शराब में खर्च करके आ गए इतने पैसों से तो 3 दिन का आटा और नमक आ जाता. फिर क्या था. पत्नी का ताना सुनते ही रामू का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया. रामू बोला-इस समय हमें ना कोरोना का डर है ना परिवार की चिंता.

हमें डर है प्रदेश की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गई तो बाकी लोगों का क्या होगा? रामू से खड़े होते नहीं बन रहा था. डगमगाए कदमों पर कभी खड़ा होता कभी गिर जाता लेकिन उसके मुंह से बार-बार यही निकलता हम बेशक लड़खड़ा जाएं लेकिन प्रदेश की अर्थव्यवस्था नहीं लड़खड़ाने देंगे, क्योंकि इसे पटरी पर लाने की जिम्मेदारी हमारी और आज जितने भी हमारे दोस्त कतार में लगे थे उन सभी की है….

विपिन दुबे,

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