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झारखंड समेत देश भर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में 4 लाख सीटें खाली, शिक्षा परिषद के अध्यक्ष ने जतायी चिंता

देश भर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में होता है प्रत्येक वर्ष 14 लाख सीटों पर नामांकन

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ब्यूरो चीफ
रांची

देश भर में इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटें खाली रहने का सिलसिला लगातार दूसरे वर्ष भी जारी है. 2018 में भी दो लाख सीटें खाली रह गयी थी. इस वर्ष अब तक 14 लाख सीटों में से 4 लाख सीटें खाली रहने की सूचना है. झारखंड में भी बीआइटी सिंदरी को छोड़ अन्य 14 सरकारी और निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटें भरना मुश्किल हो रहा है. सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद जहां एक अगस्त से सभी राज्यों में इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य ट्रेड से संबंधित शैक्षणिक कार्य शुरू कर दिये जाने थे, पर झारखंड में अब भी दूसरे दौर की काउंसेलिंग हो रही है.

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शनिवार 10 अगस्त से दूसरे चरण की काउंसलिंग झारखंड के इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए शुरू होगी. पहले चरण के बाद सिर्फ बीआइटी सिंदरी की 724 सीटें ही भर पायी हैं. राज्य में इंजीनियरिंग के 7400 सीटें हैं. राज्य के रामगढ़, दुमका और चाईबासा में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर तीन सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज चलाये जा रहे हैं. इन तीनों कॉलेजों में तीन-तीन सौ सीटें हैं. इनमें सरकार की फ्री सीट और पेड सीट के आधार पर प्रत्येक वर्ष नामांकन लिया जाता है.

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यहीं स्थिति पश्चिम बंगाल की भी है. पश्चिम बंगाल में इंजीनियरिंग की 22175 सीटें खाली रह गयी. यहां पर जाधवपुर विश्वविद्यालय समेत 90 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेजों में बीटेक की पढ़ाई होती है. जाधवपुर विवि में ही 1260 सीटों में से सिर्फ 1076 पर ही छात्रों ने नामांकन लिया है. इंजीनियरिंग की 60 फीसदी सीटें पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा की काउंसलिंग के बाद खाली रह गयी हैं. तमिलनाडू में 499 इंजीनियरिंग कॉलेजों के 1.73 लाख सीटों में से 83296 खाली रह गये हैं. कर्नाटक संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद (कोमेड) की ताजा रिपोर्ट भी यहीं बयां कर रही हैं कि उनके 181 इंजीनियरिंग कॉलेजों की 40 फीसदी से अधिक सीटें खाली रह गयी हैं.

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एआइसीटीइ ने जतायी चिंता :

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीइ) के अध्यक्ष अनिल सहस्त्रबुद्धे ने इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटें नहीं भरे जाने पर चिंता जतायी है. उन्होंने कहा है कि कई राज्यों को कहा गया था कि वे सीटें भरने को लेकर नहीं बल्कि कॉलेजों की सीटें को कम करने पर अधिक ध्यान दें. बावजूद इसके अब तक सही तरीके से कार्रवाई नहीं की गयी. उन्होंने कहा है कि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की तरफ से गिरते एडमिशन के ग्राफ को लेकर एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर दी है. यह कमेटी जल्द अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी.

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