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वामदलों की मांग, अनुसूचित क्षेत्र में आम लोगों की न्यायिक प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करें

by bnnbharat.com
August 13, 2020
in समाचार
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  • झारखंड हाई कोर्ट के दुमका बेंच की स्थापना

  • विभिन्न न्यायालयों मे विशेष सरकारी अधिवक्ताओं (अनुसूचित क्षेत्र) की नियुक्ति

  • आदिवासी सलाहकार परिषद का गठन जल्द किया जाय

रांचीः वामदल अपनी कई मांगों को लेकर  जल्द ही राज्यपाल से मिलकर स्मार-पत्र सौंपेंगे. इसका निर्णय गुरुवार को हुई  वामदलों की डिजिटल प्लेटफार्म पर संपन्न हुई संयुक्त बैठक में लिया गया.  कहा गया कि झारखंड राज्य का एक बड़ा हिस्सा  जहां आदिवासी जनसंख्या निवास करती है वह क्षेत्र भारत के संविधान की 5वीं अनुसुची से आच्छादित है. जिसके चलते इस क्षेत्र मे उन्हें संविधान प्रदत्त संरक्षण प्राप्त है.

जिसके अंतर्गत 32 अधिसूचित आदिवासी समुदाय को जल, जंगल, जमीन की रक्षा, सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक,सांस्कृतिक, भाषा-परंपरा की रक्षा सहित सरकारी सेवाओं और पंचायती राज प्रणाली में पैसे के तहत विशेष आरक्षण का अधिकार प्राप्त है.

लेकिन दूसरी ओर यह भी सच्चाई है कि कार्यपालिका की उदासीनता और दक्षता में कमी के कारण आदिवासियों के अधिकारों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन होता है. विशेष कर उनके भूमि संबंधी अधिकारों को संरक्षण देने में कार्यपालिका यानि प्रशासनिक मशीनरी नकारा साबित हुयी है.

जबकि आदिवासियों और अन्य दूसरे गरीबों को झारखंड नये राज्य के गठन के पूर्व और झारखंड की स्थापना के बाद भी उनकी जमीन बड़े पैमाने पर हड़पी गयी और कई मामलों में उन्हें जबर्दस्ती बेदखल किया गया है. विभिन्न सक्षम न्यायालयों द्वारा जमीन संबधी मामलों में आदिवासी और दूसरे गरीबों के पक्ष मे फैसला आने के बावजूद दखल दहानी के हजारों मामले लंबित पड़े हुए हैं.

वर्ष 2006  में वन अधिकार कानून लागू होने के बावजूद पीढ़ी दर पीढ़ी से जंगल क्षेत्र मे बसे हुए आदिवासियों और दूसरे अन्य गरीबों को वन विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा जंगलों से उच्छेद किए जाने की घटनाएं लगातार घटती रहती हैं. दूसरी ओर कथित विकास के नाम पर विस्थापन का दंश भी सबसे अधिक इसी समुदाय को झेलना पड़ रहा है.

इस पृष्ठभूमि में वामदलों की स्पष्ट समझ है कि आजादी की 74 वीं वर्षगांठ के मौके पर झारखंड की आदिवासी और अन्य गरीब जनता को त्वरित न्याय सुलभ कराने के लिए उपरोक्त मांगों को लागू किए जाने की दिशा में एक व्यापक अभियान चलाया जाय.

उपरोक्त मांगों पर झारखंड राज्य विधिज्ञ परिषद, अधिवक्ताओं के कई संगठन और राज्य के लोकतांत्रिक संगठनों ने भी पहल की है जो कि एक स्वागत योग्य कदम है

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