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जरमुंडी अपना प्रतिनिधि बदलने के लिए रहा है चर्चित

त्रिकोणीय संघर्ष के आसार,परिणाम चौंकानेवाला हो तो कोई आश्चर्य नहीं

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दुमका: झारखंड के दुमका जिले में अवस्थित जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र अपना प्रतिनिधि बदलने के लिए चर्चित रहा है. अपवाद को छोड़कर शायद ही किसी प्रत्याशी को एक ही दल या प्रत्याशी के रूप में दोबरा विजयीश्री मिला हो.

गोड्डा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से जुड़ा यह विधानसभा क्षेत्र दुमका जिले के जरमुंडी प्रखंड के साथ देवघर जिले के सारवां और रायकियारी प्रखंड क्षेत्र तक फैला हुआ है. दुमका जिले में जरमुंडी एक मात्र सामान्य सीट है.

इस बार इस क्षेत्र से कांग्रेस, भाजपा, झाविमो, लोजपा, जदयू, बसपा, सपा सहित कुल 26 प्रत्याशी अपने भाग्य की आजमाईश कर रहे है. राज्य के पांचवें और अंतिम चरण में इस क्षेत्र के प्रतिनिधि के चुनाव के लिए 20 दिसंबर को वोट डाले जायेंगे.

बुधवार की शाम चुनाव प्रचार अभियान समाप्त होने के बाद सभी प्रत्याशी अब घर-घर जाकर जनसम्पर्क अभियान में जुट गये है. इस क्षेत्र के 1,18,411 पुरूष और 1,08,277 महिला सहित कुल 2,26639 मतदाता मैदान में उतरे प्रत्याशियों के भाग्य पर मुहर लगायेंगे.

चुनाव प्रचार के बाद इस क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर होने के आसार दिख रहे हैं. हालांकि भाजपा के बागी सीताराम पाठक और पूर्व मंत्री हरि नारायण राय के भाई की पत्नी के साथ झाविमो और बसपा के प्रत्याशी चुनावी जंग को बहुकोणीय बनाने के कितना सफल होते हैं यह तो परिणाम के बाद ही पता चलेगा.

2019 में सम्पन्न विधानसभा लोकसभा के चुनाव में इस क्षेत्र में भाजपा को 95,683 और झाविमो, कांग्रेस और झामुमो महागठबंधन के साझा प्रत्याशी को 45,780 वोट मिले थे. 2014 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र से 16 प्रतयाशियों ने अपने भाग्य की आजमाईश किया था.

इस चुनाव में कांग्रेस के बादल 43,981 वोट प्राप्त कर विधायक निर्वाचित हुए थे. इस चुनाव में बादल ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी झामुमो हरिनारायण राय को पराजित किया था. 2005 और 2009 में दो बार निर्दलीय निर्वाचित होकर मंत्री बननेवाले हरिनारायण राय को 41,273 मतों से ही संतोष करना पड़ा था.

इस चुनाव में भाजपा के अभय कांत प्रसाद 29,965 और झाविमो के देवेन्द्र कुंवर 14,189 वोट बटोर कर क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर अपनी जगह बना पाये थे.

जानकारों के अनुसार, 1952 में प्रथम विधानसभा के चुनाव में जरमुंडी प्रखंड, पौड़ेयाहाट सह जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा था. जहां से दो सदस्यों के चुनाव का प्रावधान किया गया था. प्रथम चुनाव में इस क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर सामान्य जाति से जगदीश नारायण मंडल और अजजा से झापा के चुनका हेम्ब्रम निर्वाचित हुए थे.

1957 में दुमका जिले के जरमुंडी और देवघर जिले के सारवां प्रखंड दुमका विधानसभा क्षेत्र में जोड़ कर दिया गया और सामान्य से एक और अजजा से एक सहित दो सदस्यों के निर्वाचन का प्रावधान किया गया.

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इस चुनाव में दोनां सीट पर झापा के प्रत्याशी विजयी रहे. विधानसभा के द्वितीय चुनाव में सामान्य जाति से सनाथ राउत और अजजा से बेनजामिन हांसदा निर्वाचित हुए. 1962 में देवघर जिले के सारवां और दुमका जिले के जरमुंडी प्रखंड को मिलाकर सामान्य जाति के एक सदस्यीय जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र का गठन किया गया.

इस चुनाव में कांग्रेस के श्रीकांत झा ने निर्दलीय मैदान में उतरे सनाथ राउत को हरा कर कांग्रेस का झंडा गाड़ दिया, लेकिन 1967 के चुनाव में निर्दलीय सनाथ राउत ने एक बार फिर कांग्रेस के श्रीकांत झा को पराजित कर अपनी मजबूत पकड़ का एहसास करा दिया. लेकिन 1969 के चुनाव में सनाथ राउत कांग्रेस के ही अपने पुराने प्रतिद्वंदी श्रीकांत झा से परास्त हो गये.

श्रीकांत झा ने 1972 में भी इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा. 1977 में जनता लहर में इस क्षेत्र पर हंडवा राजपरिवार के सदस्य निर्दलीय दीपनाथ राय ने जीत दर्ज की और समय पर चुनाव चिन्ह समय पर जमा नहीं कर पाने के कारण जनता पार्टी समर्थित छात्र नेता अभयकांत प्रसाद पराजित हो गये.

1980 में निर्दलीय जवाहर प्रसाद सिंह ने इस सीट पर हंडवा राजपरविर से ताल्लुक रखनेवाले दीपनाथ राय को पराजित कर अपना विजय पताका फहराया, लेकिन 1985 में जवाहर प्रसाद सिंह इस सीट को नहीं बचा पाये और भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे अभय कांत प्रसाद ने जवाहर सिंह को हरा कर दुमका जिले में पहली बार भाजपा का कमल खिलाने में सफल हुए.

1990 में निर्दलीय जवाहर प्रसाद सिंह ने एक बार फिर अभय कांत प्रसाद से यह सीट छीन ली. 1995 में पांसा पलटा और झामुमो के टिकट पर हंडवा राज परिवार के वंशज राजा देवन्द्र कुंवर ने तीर-धनुष से अपने प्रतिद्वंदियों को चुनावी जंग में परास्त कर दिया. लेकिन 2000 में झामुमो की डूबती नैया पर सवार होने के बदले देवन्द्र कुंवर भाजपा में शामिल हो गये.

इस चुनाव में भाजपा के टिकट पर पार्टी बदल देवेन्द्र कुंवर लगातार दूसरी बार विधायक चुने गये और इस क्षेत्र के लिए एक नयी इबारत ली दी. लेकिन देवेन्द्र बहुत अधिक दिनों तक इस क्षेत्र पर अपना कब्जा बरकरार नहीं रख पाये.

2005 में निर्दलीय हरिनारायण राय ने उन्हें परास्त कर दिया और पांच वर्ष के अंतराल में बनी सभी सरकारों में मंत्री पद पर आसीन रहे. 2009 भी निर्दलीय हरिनारायण राय इस क्षेत्र से लगातार दूसरी बार विधायक निर्वाचित हुए और मंत्री बनने के साथ पूर्व के रिकार्ड को तोड़ने में सफल रहे.

2014 में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हरि नारायण राय से जनता ने किनारा कर लिया और कांग्रेस के सादा जीवन पसंद बादल पत्रलेख को अपना विधायक चुना. इस चुनाव में कांग्रेस के निवर्तमान विधायक बादल को भाजपा के देवेन्द्र कुंवर के साथ पूर्व मंत्री हरिनारायण राय के भाई की पत्नी निर्दलीय फूल कुमारी, झाविमो के संजय कुमार, लोजपा के वीरेन्द्र प्रधान और बसपा के संजयानन्द झा से कड़ी चुनौती मिल रही है.

इस जंग में भाजपा से बगावत कर मैदान में उतरे सीता राम पाठक भाजपा और कांग्रेस के बादल का खेल बिगाड़ने के प्रयास में है. इस क्षेत्र से मैदान में उतरे अन्य प्रत्याशी कितना वोट बटोर पाते हैं. यह देखना दिलचस्प होगा. क्षेत्र के राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो अंततः इस क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा के साथ निर्दलीय सीता राम पाठक के बीच त्रिकोणीय मुकाबले होने के आसार है. हालांकि कुछ अन्य विश्लेषकों की माने तों पूर्व के इतिहासों के आधार पर इस क्षेत्र में चुनाव परिणाम चौंकानेवाला हो तो कोई आश्चर्य नहीं होगा.

  • 1952 से 2014 के बीच जरमुंडी से निर्वाचित विधायकों की सूची
  • 1952-पौरेयाहाट सह जरमुंडी दो सदस्यीय (एक सामान्य-एक अजजा)
    1. जगदीश नारायण मंडल- कांग्रेस (सामान्य)
    2. चुनका हेम्ब्रम- झापा(अजजा)
  • 1952- दुमका विधानसभा दो सदस्यीय (एक सामान्य एवं एक अजजा)
    1. सनाथ राउत- झापा (सामान्य)
    2. बेनजामिन हांसदा- झापा(अजजा)
  • 1962- जरमुंडी (सामान्य) एक सदस्यीय- श्रीकांत झा- कांग्रेस
  • 1967- जरमुंडी- सनाथ राउत-निर्दलीय
  • 1969- जरमुंडी- श्रीकांत झा- कांग्रेस
  • 1972- जरमुंडी- श्रीकांत झा- कांग्रेस
  • 1977- जरमुंडी- दीप नाथ राय- निर्दलीय
  • 1980- जरमुंडी- जवाहर प्रसाद सिंह- निर्दलीय
  • 1985- जरमुंडी- अभय कांत प्रसाद- भाजपा
  • 1990- जरमुंडी- जवाहर प्रसाद सिंह- निर्दलीय
  • 1995- जरमुंडी- देवेन्द्र कुंवर- झामुमो
  • 2000- जरमुंडी- देवेन्द्र कुंवर- भाजपा
  • 2005- जरमुंडी- हरि नारायण राय- निर्दलीय
  • 2009- जरमुंडी- हरि नारायण राय- निर्दलीय
  • 2014- जरमुंडी- बादल- कांग्रेस
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