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कोरोना वायरस का काल है जावित्री, सदियों से हवन में होता आया है प्रयोग

इस होली पर 9 मार्च को अपने गांव चौपालों पर सामूहिक जावित्री मसाले से युक्त सामग्री से यज्ञ कीजिए, इस दो-तीन घंटे में आप अपने गांव राष्ट्र को बचा सकते हैं.

भारत: कोरोना वायरस दुनिया में कहर ढा रहा है अब यह चीन की महामारी ना होकर विश्वमहारी की ओर बढ़ रहा है. 50 देशों में फैल गया है 2800 से अधिक मौतें 75000 से अधिक केस सामने आ आ चुके हैं. कोरोना इबोला हेपेटाइटिस स्वाइन फ्लू या अन्य महामारी संक्रमण के लिए जिम्मेदार वायरस कोई आजकल के तो है नहीं यह भी उतने ही प्राचीन है कि जितना प्राचीन पृथ्वी पर जीवन है.
14 शताब्दी में मध्य एशिया यूरोप में प्लेग के वायरस ने 20 करोड लोगों को प्रभावित कर दिया था यह वायरस भारत का कुछ नहीं बिगाड़ पाया.
भारत की संस्कृति यज्ञ संस्कृति रही है यज्ञ ने इस देश को महामारी संक्रामक रोग से बचाया है यहां जो भी महामारी आई पराधीनता के काल में आई या जब से हमने यज्ञ करना कराना छोड़ दिया.

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भारत से 9000 किलोमीटर दूर दक्षिण एशियाई देश है इंडोनेशिया यह 2,000 से अधिक छोटे बड़े टापू से मिलकर बना देश है. यह आर्यव्रत का हिस्सा था सनातन वैदिक संस्कृति से ही संरक्षित होता था. इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता है जो उसके प्राचीन नाम जयकृत का अपभ्रंश है. राजे महाराजे भारत के इस देश से जावित्री और जायफल मसाले को मंगाते थे यह मसाला अपने देश में नहीं होता, इंडोनेशिया के बाली सुमात्रा जावा द्वीप में यह होता है. जावित्री , जायफल एक ही पेड़ के उत्पाद है जायफल पेड़ का बीज है तथा जावित्री बीज को घेरा हुए लाल आवरण है.
जावित्री केवल मसाला ही नहीं यह दुनिया की बेस्ट एंटी वायरल मेडिसिन है. हमारे पूर्वज हवन सामग्री में मिलाकर यज्ञ में इसे डालते थे.जावित्री इन रोगों का खात्मा करती है जो स्वसन तंत्र को प्रभावित करते हैं कोरोनावायरस से जुकाम फेफड़ों का तीव्र संक्रमण एक्यूट रेस्पिरेट्री सिंड्रोम कहते हैं उसका खात्मा कर देती है. कोरोनावायरस बड़ा ही अजीबोगरीब है. यह वायरसों के एक परिवार का सदस्य है जिसने सभी का कॉमन नाम कोरोना ही है. हाल फिलहाल जिस से चीन में आतंक फैला हुआ है वैज्ञानिकों ने उसका नाम कोविड 2019 रखा है. यह वायरस गोलाकार होता है इसके चारों तरफ सुनहरे कांटे होते हैं इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से जब देखते हैं एक क्राउन( ताज) की भांति यह आवरण से ढका हुआ होता है.कोरोना परिवार के वायरस साधारण जुकाम से लेकर खतरनाक निमोनिया के लिए जिम्मेदार है.
United State Disease Control , विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस कोरोना 2019 वायरस के सामने लाचार है ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन केवल एडवाइजरी इस वायरस से बचाव के तरीके ही जारी कर रहा है.

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अभी तक तो दुनिया की किसी लेबर्ट्री में इस वायरस के खिलाफ कोई एंटीवायरल ड्रग नहीं बनी है Remedesvir नामक ड्रग को इसका समाधान खोजा जा रहा है लेकिन वह अभी क्लिनिकल ट्रायल से कोसों दूर है.

यह तो रहा संक्षिप्त में इस वायरस का वैज्ञानिक वर्णन अब मुद्दे पर लौटते हैं कोरोना क्या जितने भी ज्ञात अज्ञात वायरस हैं जो खोजे गए हैं या खोजे जाएंगे उनकी संख्या 10 करोड़ से अधिक बताई जाती है सभी का काल है यज्ञ.

अपने देश में होली, दीपावली जैसे प्राचीन त्योहारों पर ऋतु अनुकूल सामग्री से बड़े-बड़े यज्ञ करने की स्वस्थ परंपरा रही है. फागुन , चैत्र के महीने में जब जावित्री को यज्ञ सामग्री में मिलाकर व खेतों में उगे हुए गेहूं जौ की बालियों को मिलाकर यज्ञ किया जाए तो यह खतरनाक वायरस मानव शरीर तो क्या गांव की सीमाओं में भी नहीं घुस सकते.
महर्षि दयानंद सरस्वती ने संस्कार विधि पुस्तक में सावित्री की गणना सुगंधी कारक जड़ी बूटी में की है जावित्री केवल सुगंधीकारक ही नहीं रोग नाशक भी है.

जावित्री कोई बहुत महंगा मसाला नहीं है ₹20 में 10 ग्राम मिलती है अर्थात ₹2000 किलो है 1 किलो जावित्री से एक गांव को वायरस से मुक्त किया जा सकता है यदि विधिवत यज्ञ किया जाए, साथ ही ऋतु अनुकूल सामग्री इस्तेमाल में लाई जाए.

साथियों अपने देश को कोरोनावायरस से सर्वाधिक खतरा है क्योंकि भारत विशाल आबादी का देश है चीन से हमारी सीमाएं मिली हुई है यह तो ईश्वर का कोई कर्म है यह virus भारत में अभी नहीं फैला है. कोरोना वायरस से पीड़ित व्यक्ति की छींक की एक बूंद में करोड़ों वायरस होते हैं एक व्यक्ति छींक के द्वारा एक समय पर दर्जनों लोगों को संक्रमित कर सकता है.

सरकार के भरोसे मत बैठिए सरकारे इस वायरस से आपको नहीं बचा पाएंगी बताना चाहूंगा ईरान सहित कुछ मध्य एशियाई देशों के तो उपराष्ट्रपति भी इस वायरस से संक्रमित हैं.

वायरस से आपको केवल और केवल यज्ञ ही बचा सकता है यदि सभी रोगों की एंटीवायरल एंटीबायोटिक थेरेपी है.

लेखक की अपील: इस होली पर 9 मार्च को अपने गांव चौपालों पर सामूहिक जावित्री मसाले से युक्त सामग्री से यज्ञ कीजिए, इस दो-तीन घंटे में आप अपने गांव राष्ट्र को बचा सकते हैं.

 

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