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विकास की बात बेमानी, सड़क जर्जर पैदल चलना भी मुश्किल

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पंकज सिंह

इटखोरी: विधानसभा चुनाव को पांच साल पूरा हो गया है. फिर से नेताओं द्वारा गांव में विकास का ढ़ोल पीटा जा रहा है. सार्वजनिक मंचों से विकास के दावे किये जा रहे है. लेकिन विकास कहीं नजर नहीं आ रहा है.

आज भी गांवों को शहर की मुख्य धारा से जोड़ने वाली कई सड़कों की हालत बहुत ही दयनीय है. जिस पर पैदल चलना तक मुश्किल है परंतु इन सड़कों का विकास करने की बजाए केवल ठगने का काम किया जा रहे है. प्रखंड कार्यालय से 500 मीटर दूर नगवां ढोटवा 12 किमी. की सड़क मार्ग की हालत बहुत ही जर्जर हो चुकी है. जिस पर चलना मुश्किल हो गया है. ग्रामीणों का आरोप है कि सत्ताधारी पार्टी के नेता इस सड़क की सुध नहीं ले रहे है. ऐसे में विकास का दावा सिर्फ बेमानी साबित हो रहा है.

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ग्रामीणों ने बताया कि कई बार सड़क के नवनिर्माण की मांग करते हुए जनप्रतिनिधियों एवं अफसरों का ध्यानाकर्षण कराया गया लेकिन इसके बावजूद कभी ग्रामीणों की मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसका खामियाजा आज गांव की जनता को भुगतना पड़ रहा है. आज ग्रामीण जनता को आवागमन में बहुत ही मुश्किल हो रही है. जर्जर सड़क के कारण आये दिन सड़क हादसे हो रहे हैं. इसके अलावा वाहनों को भी काफी नुकसान पहुंच रहा है.

मालूम हो कि इस सड़क से जुड़े तकरीबन एक दर्जन गांव के लोग प्रभावित रास्ते से चलने को मजबूर हैं. जानकारी के मुताबिक इस मार्ग से टोनाटाड, हलमता, सालवे, ढोटवा, सहित अन्य गांव के लोगों का प्रखंड कार्यालय आना-जाना होता है. इसके अलावा हाईस्कूल अध्ययन करने के लिए प्रतिदिन बडी संख्या में छात्र-छात्राएं इसी सड़क का उपयोग करते है. जिन्हें मार्ग के जर्जर रहने के कारण काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है.

इस मार्ग पर जगह जगह बड़े बड़े गड्ढे बन गये हैं, जिस कारण पता हीं नहीं चलता सड़क में गड्ढा है या गड्ढे में सड़क. जो कि सरकार के विकास के दावों की पोल खोलती नजर आ रही है. उक्त गांवों के स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय उदासीनता व राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी की वजह से सड़क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है.

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