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टुसू पूर्व की धूम, मकर संक्रांति का भी उल्लास

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रांची: सूर्य देव के उत्तरायण होते ही सभी सृष्टि में सृजन का आरंभ होता है और साथ ही मकर संक्रांति का त्योहार पूरे उत्तर पूर्वी भारत में धूम धाम से मनाया जा रहा है. वहीं झारखंड में मकर संक्रांति के साथ ही रांची और आसपास के क्षेत्रों में टुसू पर्व और संतालपरगना प्रमंडल के इलाके में सोहराय या बंधना पर्व की धूम देखी जा रही है.

धूमधाम और उल्लास के साथ मनाये जाने वाले टुसू पर्व पूरे महीने चलने वाला पर्व है, जहां राज्य के विभिन्न हिस्सों में पर्व के अंतिम चार दिनों में औरतें और लड़कियां टुसु की आराधना करते हुए गीत गाती हैं. टुसू हिन्दी महीने के अनुसार अगहन पूर्णिमा से लेकर पौष पूर्णिमा तक चलता है.

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अगहन पूर्णिमा के दिन ही ‘ढकनी- सौरा स्थापना’ की जाती है और पूरे महीने चलने वाले इस पर्व में पूरा माहौल संगीतमय हो जाता हैं.

दूसरी तरफ झाखंड में ही दुमका, साहेबगंज, देवघर और गोड्डा जिले में सोहराय पर्व धूमधाम और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. संताल आदिवासियों का यह महापर्व मूल रूप से प्रकृति की पूजा है. आज जब हम धरती को बचाने के लिए आंदोलन कर रहे है वहां सात दिनों तक चलने वाले इस पर्व में जील ढांका पूजा, बरद खूंटा, नृत्य संगीत, शिकार और गाय-बरद की पूजा की जाती है.

इस पर्व में बेटियों और बहनों को भी पूरी इज्जत और मान से बुलाया जाता है. यह पर्व स्त्री संस्कार और आधुनिक खुलापन का मिश्रन है. संताल भाई-बहन अपने पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों के साथ इस उत्सव को मना रहे है.

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