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पालन-पोषण की शैली (परवरिश-3)

पालन-पोषण की शैली (परवरिश-3)

राहुल मेहता

सुनीता के साथ छेड़-छाड़ की घटना के बाद उसपर अनेक पाबंदियां लगा दी गयी. उसका अकेले बाहर आना जाना सीमित हो गया. उसकी दोस्त रेखा ने उसे कहा- “मैंने शुरू में ही कहा था न कि घर में बता दो, अगर बता देती तो बात इतनी नहीं बिगड़ती न”.

क्या सुनीता के लिए यह इतना आसान था ? आखिर सुनीता प्रारंभ में इस घटना के बारे में अपने अभिभावकों को क्यों नहीं बता पाई ? इसके लिए सिर्फ वही जिम्मेदार थी या अभिभावक और परिवेश भी ? क्या आपने कभी सोचा है कि परवरिश की शैलियों का बच्चों के मनःस्थिति और विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

परवरिश शैली

एक अच्छी परवरिश शैली बच्चों के सलामती, आत्म सम्मान और पारस्परिक सम्बन्ध को बढ़ावा देते हैं. परवरिश शैलियां प्रमुखतः चार प्रकार की होती हैं:

  • बहुत सख्त
  • दृढ़ -लेकिन-निष्पक्ष
  • अनुमोदक और
  • उदासीन

परिस्थिति के आधार पर परवरिश शैलियां भिन्न हो सकती हैं. अभ्यास से अच्छी परवरिश सीखी जा सकती है.

  1. बहुत सख्त होने पर बच्चे –
  • आज्ञाकारी होते है, स्कूल में अच्छा कर सकते हैं, लेकिन आलोचना के कारण वे दब्बू हो सकते हैं.
  • वार्तालाप और निराशा से निपटने में कमजोर होते हैं.
  1. दृढ़-लेकिन-निष्पक्ष होने पर बच्चे –
  • ख़ुशमिजाजी होते हैं और सुरक्षित महसूस करते हैं.
  • उनमे आत्म-विश्वास और उच्च आत्म-सम्मान होता है.
  • अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना और अच्छे सामाजिक कौशल सीखते हैं.
  1. अनुमोदक होने पर बच्चे –
  • स्वतंत्रता का अल्पकालिक का आनंद लें सकते हैं, लेकिन वे भावनाओं को ठीक से नियंत्रित नहीं कर सकते.
  • विद्रोही, आवेगी और उद्दंड हो सकते हैं.
  1. उदासीन होने पर बच्चे –
  • खुद को उपेक्षित और दुखी महसूस करते हैं.
  • खुद को नियंत्रित नहीं कर पाते. उनमे आत्मसम्मान और आत्मविश्वास की कमी होती है.
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मंथन करें :

  • आपको कौन सी परवरिश शैली पसंद है, और क्यों ?
  • परवरिश की शैली में सुधार करने के लिए आप क्या कर सकते हैं ?

अभिभावकों के लिए ज्यादातर स्थितियों में, दृढ़ लेकिन निष्पक्ष शैली की सिफारिश की जाती है. बच्चों के सर्वांगीन विकास के लिए दृढ़ रहें और अपने बच्चों के लिए स्पष्ट नियम रखें, लेकिन ऐसा प्यार से करें.

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